कोर्ट पीस चार खिलाड़ियों का ताश का खेल है, दो-दो की जोड़ी में।
52 पत्तों की गड्डी, एक बाज़ी लगभग दस मिनट, और हर परिवार थोड़ा अलग खेलता है।
नीचे वही नियम हैं जो असल में खेले जाते हैं।
क्या चाहिए
चार खिलाड़ी, दो जोड़ियाँ
52 पत्तों की गड्डी
साथी सामने बैठता है, ताकि बारी बारी-बारी से दोनों टीमों में आए
बाँट
पहले हर खिलाड़ी को सिर्फ़ पाँच पत्ते मिलते हैं — पूरा हाथ नहीं।
यही खेल की जान है: रंग पाँच पत्तों पर चुनना पड़ता है, बाक़ी देखे बिना।
हर खिलाड़ी को पाँच पत्ते।
बाँटने वाले के दाएँ बैठा खिलाड़ी उन्हीं पाँच को देखकर रंग (तुरुप) बोलता है।
फिर बाक़ी गड्डी बाँटी जाती है — सबके पास तेरह पत्ते हो जाते हैं।
रंग कौन बोलेगा, यह शुरू में पत्ता खींचकर तय होता है — सबसे बड़ा पत्ता जिसका, रंग उसका।
हाथ खेलना
हाथ यानी एक चाल: चार पत्ते, हर खिलाड़ी से एक।
पहला खिलाड़ी कोई भी पत्ता चलता है। बाक़ी सबको वही रंग फॉलो करना ज़रूरी है, अगर उनके पास है।
उस सूट का पत्ता न हो तो तुरुप से काट सकते हैं। तुरुप का दुक्का भी किसी और सूट के इक्के को हरा देता है।
न फॉलो कर सकें, न काटना चाहें — तो कुछ भी फेंक दीजिए, वह जीत नहीं सकता।
सबसे बड़ा तुरुप जीतता है। तुरुप न चला हो तो चले हुए सूट का सबसे बड़ा पत्ता।
जीतने वाला अगला हाथ शुरू करता है।
बाज़ी जीतना
तेरह हाथ खेले जाते हैं। सात हाथ जीतते ही बाज़ी आपकी।
कोट
अगर एक ही जोड़ी सातों हाथ ले ले और सामने वाले को एक भी न मिले,
तो वह कोट है — और दुगना गिना जाता है। खेल का असली मज़ा इसी में है,
और नाम भी इसी से पड़ा।
घर-घर के अपने नियम
अगली बाँट किसकी। ज़्यादातर घरों में हारने वाली टीम बाँटती रहती है।
इक्के पर इक्का। कुछ घरों में साथी की जीती हुई चाल काटना मना है।
पहले हाथ पर तुरुप। कुछ जगह पहली चाल पर काटना मना है।
सात या पूरे तेरह। सात पर रुकें या कोट के लिए पूरा खेलें।
इनमें कोई नियम ज़्यादा सही नहीं है। जो आपके घर में चलता आया है, वही सही है।
शुरुआती रणनीति
रंग उस सूट का बोलिए जिसके पत्ते सबसे ज़्यादा हों, सबसे बड़े नहीं।
अपना सबसे लंबा सूट चलिए — तुरुप बाहर निकलवाइए।
साथी क्या फेंक रहा है, उस पर ध्यान दीजिए। फेंका हुआ सूट अक्सर इशारा होता है।
तुरुप गिनते रहिए। तुरुप ख़त्म तो आपका लंबा सूट अपने आप जीतेगा।